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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ
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श्लोक 47
श्लोक
6.84.47
एवमुक्त: स वार्ष्णेय: कौन्तेयेनामितौजसा।
रथं श्वेतहयैर्युक्तं प्रेषयामास संयुगे॥ ४७॥
अनुवाद
विनयशील कुन्तीकुमार अर्जुन के ऐसा कहने पर वृष्णिकपुत्र भगवान श्रीकृष्ण श्वेत घोड़ों से जुते हुए रथ को युद्ध में ले गए॥47॥
On these words of the amiable Kuntikumar Arjuna, Lord Krishna, the son of Vrishnik, led the chariot drawn by white horses into the battle. 47॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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