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mahabharat 6.84.4: युद्ध में वे बाण महात्मा युधिष्ठिर के शरीर में घुसकर मानो उनके प्राणों की खोज कर रहे थे, उनके कवच को छेदकर उनका रक्त पीने लगे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.84.4 
ते तस्य कवचं भित्त्वा पपु: शोणितमाहवे।
असूनिव विचिन्वन्तो देहे तस्य महात्मन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में वे बाण महात्मा युधिष्ठिर के शरीर में घुसकर मानो उनके प्राणों की खोज कर रहे थे, उनके कवच को छेदकर उनका रक्त पीने लगे॥4॥
 
In the battle those arrows entered the body of Mahatma Yudhishthir, as if searching for his life, piercing his armour and started drinking his blood. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)