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श्लोक 6.84.39  |
स तु तं रथमुत्सृज्य धृष्टकेतुर्महामना:।
आरुरोह ततो यानं शतानीकस्य मारिष॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| आर्य! तत्पश्चात् महामनस्वी धृष्टकेतु उस रथ को छोड़कर शतानीक के वाहन पर बैठ गये। |
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| Arya! Thereafter the great-minded Dhrishtaketu left that chariot and sat on Shatanik's vehicle. |
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