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mahabharat 6.84.37: तत्पश्चात् भूरिश्रवाण ने उत्तम बाणों से युद्धस्थल में महारथी धृष्टकेतु के घोड़ों तथा सारथि को मार डाला, जिससे वह रथहीन हो गया।   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.84.37 
भूरिश्रवास्तु समरे धृष्टकेतुं महारथम्।
हतसूतहयं चक्रे विरथं सायकोत्तमै:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भूरिश्रवाण ने उत्तम बाणों से युद्धस्थल में महारथी धृष्टकेतु के घोड़ों तथा सारथि को मार डाला, जिससे वह रथहीन हो गया।
 
Then, Bhurishravane, with the help of excellent arrows, killed the horses and charioteer of the great warrior Dhrishtaketu in the battle-field, leaving him without a chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)