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mahabharat 6.84.36: महाराज! उन बाणों को छाती में गड़ाकर भूरिश्रवा ऐसा शोभायमान होने लगा, जैसे मध्याह्न के समय सूर्य अपनी किरणों से अधिक प्रकाशित दिखाई देता है।   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.84.36 
सौमदत्तिरुर:स्थैस्तैर्भृशं बाणैरशोभत।
मध्यन्दिने महाराज रश्मिभिस्तपनो यथा॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उन बाणों को छाती में गड़ाकर भूरिश्रवा ऐसा शोभायमान होने लगा, जैसे मध्याह्न के समय सूर्य अपनी किरणों से अधिक प्रकाशित दिखाई देता है।
 
Maharaj! With those arrows stuck in his chest, Bhurishrava started looking as beautiful as the sun appears more bright through its rays at noon. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)