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mahabharat 6.84.34: हे प्रजानाथ! इसी प्रकार आपके साले पराक्रमी शकुनि ने भी रथियों में श्रेष्ठ कृपाचार्य को शीघ्रतापूर्वक अपने रथ पर बैठा लिया।   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.84.34 
तथैव शकुनि: शूर: श्यालस्तव विशाम्पते।
आरोपयद् रथं तूर्णं गौतमं रथिनां वरम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! इसी प्रकार आपके साले पराक्रमी शकुनि ने भी रथियों में श्रेष्ठ कृपाचार्य को शीघ्रतापूर्वक अपने रथ पर बैठा लिया।
 
O Prajanath! Similarly, your brother-in-law, the valiant Shakuni, quickly made Kripacharya, the best among charioteers, sit on his chariot. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)