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mahabharat 6.84.30: वे दोनों बहुत बलवान थे। दोनों के पास बहुत अच्छी तलवारें थीं। इसलिए उन्होंने अपनी तेज़ तलवारों से एक-दूसरे को काटना शुरू कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.84.30 
तावुभौ बलसम्पन्नौ निस्त्रिंशवरधारिणौ।
निस्त्रिंशाभ्यां सुतीक्ष्णाभ्यामन्योन्यं संततक्षतु:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों बहुत बलवान थे। दोनों के पास बहुत अच्छी तलवारें थीं। इसलिए उन्होंने अपनी तेज़ तलवारों से एक-दूसरे को काटना शुरू कर दिया।
 
Both of them were very strong. Both of them were carrying very good swords. So they started cutting each other with their very sharp swords. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)