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mahabharat 6.84.29: राजन! यह देखकर कृपाचार्य ने भी अपना धनुष फेंक दिया और तलवार उठा ली और बड़ी सावधानी से बड़े वेग से चेकितान की ओर दौड़े।   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.84.29 
गौतमोऽपि धनुस्त्यक्त्वा प्रगृह्यासिं सुसंयत:।
वेगेन महता राजंश्चेकितानमुपाद्रवत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजन! यह देखकर कृपाचार्य ने भी अपना धनुष फेंक दिया और तलवार उठा ली और बड़ी सावधानी से बड़े वेग से चेकितान की ओर दौड़े।
 
King! Seeing this, Krupacharya also threw away his bow and took up his sword and with utmost caution he ran towards Chekitana at great speed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)