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श्लोक 6.84.23  |
अश्वांश्चास्यावधीद् राजन्नुभौ तौ पार्ष्णिसारथी।
सोऽवप्लुत्य रथात् तूर्णं गदां जग्राह सात्वत:॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! तदनन्तर कृपाचार्य ने चेकितान के चार घोड़ों और दो अंगरक्षकों को मार डाला। तब सात्वतवंशी चेकितान ने रथ से कूदकर तुरन्त गदा हाथ में ले ली। 23॥ |
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| Rajan! Subsequently, Kripacharya killed Chekitana's four horses and two bodyguards. Then Chekitana of Satvatvanshi jumped from the chariot and immediately took the mace in his hand. 23॥ |
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