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mahabharat 6.84.2: तब राजा युधिष्ठिर ने शत्रुओं का नाश करने वाले श्रुतायु पर मुड़े हुए नौ तीखे बाणों से आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 6.84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.84.2 
अभ्यधावत् ततो राजा श्रुतायुषमरिंदमम्।
विनिघ्नन् सायकैस्तीक्ष्णैर्नवभिर्नतपर्वभि:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब राजा युधिष्ठिर ने शत्रुओं का नाश करने वाले श्रुतायु पर मुड़े हुए नौ तीखे बाणों से आक्रमण किया।
 
Then King Yudhishthira attacked Shrutayu, the destroyer of enemies, with nine sharp arrows having bent handles.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)