श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.84.13 
तत: सैन्यानि सर्वाणि तावकानि विशाम्पते।
निराशान्यभवंस्तत्र जीवितं प्रति भारत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! भरतनन्दन! उस समय आपकी सारी सेनाएँ वहाँ प्राणों की आशा खो बैठीं॥13॥
 
Prajanath! Bharatanandan! At that time all your armies lost hope of their lives there. ॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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