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श्लोक 6.84.13  |
तत: सैन्यानि सर्वाणि तावकानि विशाम्पते।
निराशान्यभवंस्तत्र जीवितं प्रति भारत॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| प्रजानाथ! भरतनन्दन! उस समय आपकी सारी सेनाएँ वहाँ प्राणों की आशा खो बैठीं॥13॥ |
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| Prajanath! Bharatanandan! At that time all your armies lost hope of their lives there. ॥ 13॥ |
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