श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरसे राजा श्रुतायुका पराजित होना, युद्धमें चेकितान और कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, भूरिश्रवासे धृष्टकेतुका और अभिमन्युसे चित्रसेन आदिका पराजित होना एवं सुशर्मा आदिसे अर्जुनका युद्धारम्भ  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.84.11 
ऋषयश्चैव देवाश्च चक्रु: स्वस्त्ययनं महत्।
लोकानां नृप शान्त्यर्थं क्रोधिते पाण्डवे तदा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! जब पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर क्रोधित हो गए, तब देवता और ऋषिगण सम्पूर्ण जगत की शांति के लिए महान् आशीर्वाद देने लगे॥11॥
 
Nareshwar! When Pandu's son Yudhishthir became angry, the gods and sages started reciting great blessings for the peace of the entire world. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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