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mahabharat 6.83.53: महाराज! उस भयंकर आघात से पीड़ित और व्यथित होकर महारथी शल्य रथ के पिछले भाग में बैठ गए और मूर्छित होकर गिर पड़े॥53॥   |   mahabharat अध्याय 6.83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.83.53 
स गाढविद्धो व्यथितो रथोपस्थे महारथ:।
निषसाद महाराज कश्मलं च जगाम ह॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस भयंकर आघात से पीड़ित और व्यथित होकर महारथी शल्य रथ के पिछले भाग में बैठ गए और मूर्छित होकर गिर पड़े॥53॥
 
Maharaj! Pained and distressed by the severe blow, the great warrior Shalya sat in the rear part of the chariot and fell unconscious. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)