Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.83.49-50: अपने भतीजों द्वारा छोड़े गए बहुत से मुड़े हुए बाणों से घायल होने पर भी वे श्रेष्ठ पुरुष पर्वत के समान अडिग रहे; न तो वे काँपे और न विचलित हुए। उन्होंने हँसकर उन अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा को नष्ट कर दिया ॥49-50॥ | mahabharat अध्याय 6.83: इरावान्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपने भतीजों द्वारा छोड़े गए बहुत से मुड़े हुए बाणों से घायल होने पर भी वे श्रेष्ठ पुरुष पर्वत के समान अडिग रहे; न तो वे काँपे और न विचलित हुए। उन्होंने हँसकर उन अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा को नष्ट कर दिया ॥49-50॥
Even after being hit by a large number of arrows with bent tips shot by his nephews, the best of men stood firm like a mountain; he did not tremble or get shaken. He destroyed that shower of weapons with a smile. ॥ 49-50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥