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mahabharat 6.83.45: बाणों की वर्षा से आच्छादित होने पर भी शल्य अत्यन्त प्रसन्न रहे। नकुल और सहदेव भी माता के समान उन पर अत्यन्त प्रेम करते थे।   |   mahabharat अध्याय 6.83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.83.45 
छाद्यमान: शरौघेण हृष्टरूपतरोऽभवत्।
तयोश्चाप्यभवत् प्रीतिरतुला मातृकारणात्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
बाणों की वर्षा से आच्छादित होने पर भी शल्य अत्यन्त प्रसन्न रहे। नकुल और सहदेव भी माता के समान उन पर अत्यन्त प्रेम करते थे।
 
Even after being covered with a hail of arrows, Shalya remained very happy. Nakula and Sahadeva also had immense love for her as their mother. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)