श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.83.30 
भैमसेनिं रथस्थं तु तत्रापश्याम भारत।
शेषा विमनसो भूत्वा प्राद्रवन्त महारथा:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे भारतपुत्र! उस समय हमने केवल भीमपुत्र घटोत्कच को ही रथ पर शान्त भाव से बैठे देखा। शेष महारथी निराश होकर वहाँ से भाग रहे थे।
 
O son of Bharat! At that time we saw only Bhima's son Ghatotkacha sitting calmly on the chariot. The rest of the great warriors were running away from there in a dejected mood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)