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श्लोक 6.81.46  |
आपतद्भिस्तु तैस्तत्र प्रभग्नं तावकं बलम्।
संचुक्षुभे महाराज वातैरिव महार्णव:॥ ४६॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज! जब पाण्डवों ने आक्रमण किया, तब आपकी सेना की व्यूह रचना टूट गई। वह सेना प्रचण्ड वायु के वेग से समुद्र के समान व्याकुल हो उठी। |
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| Maharaj! When the Pandavas attacked, your army's formation was broken. That army became agitated like the ocean due to the force of the strong wind. 46. |
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इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि सप्तमयुद्धदिवसे एकाशीतितमोऽध्याय:॥ ८१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें सातवें दिनका युद्धविषयक इक्यासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८१॥
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