श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 81: सातवें दिनके युद्धमें कौरव-पाण्डव-सेनाओंका मण्डल और वज्रव्यूह बनाकर भीषण संघर्ष  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.81.38 
एतदुक्त्वा तु कौन्तेयो धनुर्ज्यामवमृज्य च।
ववर्ष शरवर्षाणि नराधिपगणान् प्रति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर कुन्तीपुत्र अर्जुन ने धनुष की डोरी चढ़ाई और विरोधी राजाओं पर बाणों की वर्षा करने लगे।
 
Saying this, Kunti's son Arjun strung his bowstring and began showering arrows on the opposing kings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)