श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 80: भीष्मद्वारा दुर्योधनको आश्वासन तथा सातवें दिनके युद्धके लिये कौरव-सेनाका प्रस्थान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.80.7 
तेनैवमुक्त: प्रहसन् महात्मा
दुर्योधनं मन्युगतं विदित्वा।
तं प्रत्युवाचाविमना मनस्वी
गङ्गासुत: शस्त्रभृतां वरिष्ठ:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन की यह बात सुनकर और उसे क्रोध में भरा हुआ जानकर, समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, महामनस्वी गंगानन्दन भीष्म ने बड़े जोर से हँसकर प्रसन्न मन से उससे इस प्रकार कहा -॥7॥
 
Upon hearing Duryodhana say this and knowing that he was filled with anger, the great souled Ganganandan Bhishma, the best amongst all those wielding weapons, laughing loudly and with a happy mind replied to him thus -॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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