श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 80: भीष्मद्वारा दुर्योधनको आश्वासन तथा सातवें दिनके युद्धके लिये कौरव-सेनाका प्रस्थान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.80.4 
सैन्यानि रौद्राणि भयानकानि
व्यूढानि सम्यग् बहुलध्वजानि।
विदार्य हत्वा च निपीडॺ शूरा-
स्ते पाण्डवानां त्वरिता महारथा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘पितामह! हमारी सेनाएँ अत्यंत भयंकर और प्रचण्ड रूप वाली हैं। उनकी युद्ध-रचना भी बहुत अच्छी है। इन सेनाओं में ध्वजों की संख्या बहुत अधिक है, फिर भी वीर पाण्डव योद्धा उनमें प्रवेश करके तुरन्त ही हमारे सैनिकों को छेदकर मार डालते हैं, पीड़ा पहुँचाते हैं और फिर चले जाते हैं।॥ 4॥
 
‘Grandfather! Our armies are extremely fearsome and fierce in form. Their battle formation is also done very well. The number of flags in these armies is very high, yet the valiant Pandava warriors enter them and immediately pierce, kill and torment our soldiers and then go away.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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