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श्लोक 6.80.19  |
तदुग्रनागं बहुरूपवर्णं
तवात्मजानां समुदीर्णमेवम्।
बभूव सैन्यं रिपुसैन्यहन्तृ
युगान्तमेघौघनिभं तदानीम्॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज! आपके पुत्रों की वह सेना भयंकर हाथियों से भरी हुई थी। वह अनेक रूप और रंगों वाली प्रतीत होती थी। उसका वेग निरन्तर बढ़ता ही जा रहा था। उस समय वह प्रलयकाल में मेघों के समुद्र के समान शत्रु सेना का विनाश करने में समर्थ प्रतीत हो रही थी। |
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| Maharaj! That army of your sons was full of fierce elephants. It appeared to be of many forms and colours. Its speed kept on increasing. At that time, it appeared capable of destroying the enemy army like a sea of clouds during the time of doomsday. |
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इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीष्मदुर्योधनसंवादे अशीतितमोऽध्याय:॥ ८०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें भीष्म-दुर्योधन-संवादविषयक अस्सीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८०॥
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