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श्लोक 6.80.12  |
तान् पाण्डवान् योधयिष्यामि राजन्
प्रियं च ते सर्वमहं करिष्ये।
श्रुत्वैव चैतद् वचनं तदानीं
दुर्योधन: प्रीतमना बभूव॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! मैं उन पाण्डवों के साथ भी युद्ध करूँगा और आपके सभी इच्छित कार्य पूर्ण करूँगा। भीष्म के ये वचन सुनकर दुर्योधन प्रसन्न हुआ॥12॥ |
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| O King! I will fight with those Pandavas as well and accomplish all your desired tasks.' On hearing these words from Bhishma, Duryodhan became pleased.॥ 12॥ |
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