श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 54-56h
 
 
श्लोक  6.77.54-56h 
पुनर्युद्धाय समरे प्रययुर्भीमपार्षतौ।
ततो युधिष्ठिर: प्राह समाहूय स्वसैनिकान्॥ ५४॥
गच्छन्तु पदवीं शक्त्या भीमपार्षतयोर्युधि।
सौभद्रप्रमुखा वीरा रथा द्वादश दंशिता:॥ ५५॥
प्रवृत्तिमधिगच्छन्तु न हि शुद्धॺति मे मन:।
 
 
अनुवाद
वे रणभूमि में पुनः युद्ध करने के लिए भीमसेन और द्रुपदकुमार धृष्टद्युम्न की ओर बढ़े। तब राजा युधिष्ठिर ने अपने सैनिकों को बुलाकर कहा - 'तुम सब अपनी पूरी शक्ति लगाकर रणभूमि में भीमसेन और धृष्टद्युम्न के मार्ग का अनुसरण करो। अभिमन्यु तथा कवच आदि से सुसज्जित बारह वीर योद्धा भीमसेन और धृष्टद्युम्न का समाचार प्राप्त करें। मेरा मन उनके विषय में शान्त नहीं है। 54-55 1/2॥
 
They headed towards Bhimsen and Drupadakumar Dhrishtadyumna for another battle in the battlefield. Then King Yudhishthir called his soldiers and said – 'You all use all your strength and follow the path of Bhimsen and Dhrishtadyumna in the battlefield. Abhimanyu and twelve brave warriors equipped with armor etc. should receive the news of Bhimsen and Dhrishtadyumna. My mind is not at ease about them. 54-55 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)