श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  6.77.21-22h 
विशोकस्तमुवाचेदं धृष्टद्युम्नं कृताञ्जलि:।
संस्थाप्य मामिह बली पाण्डवेय: पराक्रमी॥ २१॥
प्रविष्टो धार्तराष्ट्राणामेतद् बलमहार्णवम्।
 
 
अनुवाद
तब विशोकन ने हाथ जोड़कर धृष्टद्युम्न से कहा - 'प्रभो! मुझे यहाँ खड़ा करके महाबली एवं पराक्रमी पाण्डु नन्दन कौरवों के इस सैन्य सागर में प्रवेश कर गये हैं।
 
Then Vishokane folded his hands and said to Dhrishtadyumna - 'Lord! By keeping me standing here, the mighty and powerful Pandu Nandan has entered into this military ocean of Kauravas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)