श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 71: भीष्म, अर्जुन आदि योद्धाओंका घमासान युद्ध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.71.28 
वीरबाहुविसृष्टानां सर्वावरणभेदिनाम्।
संघात: शरजालानां तुमुल: समपद्यत॥ २८॥
 
 
अनुवाद
योद्धाओं की भुजाओं से छूटती हुई बाणों की भयंकर वर्षा सब प्रकार के आवरणों (कवच आदि) को छेदती हुई सर्वत्र पड़ रही थी। 28.
 
The fierce showers of arrows released from the arms of the warriors and piercing all kinds of coverings (armour etc.) were falling everywhere. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)