श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 70: भीष्म और भीमसेनका घमासान युद्ध  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  6.70.9-10 
कवचोपहितैर्गात्रैर्हस्तैश्च समलंकृतै:।
मुखैश्च चन्द्रसंकाशै रक्तान्तनयनै: शुभै:॥ ९॥
गजवाजिमनुष्याणां सर्वगात्रैश्च भूपते।
आसीत् सर्वा समास्तीर्णा मुहूर्तेन वसुंधरा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! दो ही क्षण में सम्पूर्ण पृथ्वी कवचों से युक्त शरीरों, आभूषणों से विभूषित हाथों, चन्द्रमा के समान सुन्दर मुखों, अन्तः में किंचित लालिमा युक्त नेत्रों तथा हाथियों, घोड़ों और मनुष्यों के सम्पूर्ण अंगों से आच्छादित हो गई।
 
O king! In just two minutes the entire earth was covered with bodies covered in armour, hands adorned with ornaments, faces as beautiful as the moon with eyes that had a little redness at the end, and full body parts of elephants, horses and humans.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)