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अरत्नीनां सहस्रं च शतानि दश पञ्च च।
परिणाहस्तु वृक्षस्य फलानां रसभेदिनाम्॥ २२॥
अनुवाद
जब इसके फलों में रस निकलता है, अर्थात वे पक जाते हैं, तो वे स्वयं टूटकर गिर जाते हैं। उन फलों की लंबाई ढाई हजार अरत्नी मानी जाती है।
When the juice comes out in its fruits, that is when they are ripe, they break and fall on their own. The length of those fruits is considered to be two and a half thousand aratnis*. 22.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥