श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 7: उत्तर कुरु, भद्राश्ववर्ष तथा माल्यवान‍्का वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.7.10 
एकैकमनुरक्तं च चक्रवाकसमं विभो।
निरामयाश्च ते लोका नित्यं मुदितमानसा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! चकव और चकवी की तरह वे सदैव एक-दूसरे के साथ मैत्रीपूर्ण रहते हैं। उत्तरकुरु के लोग सदैव स्वस्थ और प्रसन्न रहते हैं॥10॥
 
Prabhu! Like the Chakva and Chakvi they always remain friendly with each other. The people of Uttarkuru always remain healthy and happy.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)