श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 68: ब्रह्मभूतस्तोत्र तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महत्ता  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.68.13 
संजय उवाच
पुण्यं श्रुत्वैतदाख्यानं महाराज सुतस्तव।
केशवं बहु मेने स पाण्डवांश्च महारथान्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! भीष्मजी के मुख से यह पवित्र कथा सुनकर आपके पुत्र ने भगवान श्रीकृष्ण और महारथी पाण्डवों को बहुत महत्वपूर्ण समझा॥13॥
 
Sanjay says- Maharaj! Hearing this holy story from the mouth of Bhishmaji, your son considered Lord Shri Krishna and the great charioteer Pandavas to be very important. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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