श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 67: भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.67.2 
भीष्म उवाच
वासुदेवो महद् भूतं सर्वदैवतदैवतम्।
न परं पुण्डरीकाक्षाद् दृश्यते भरतर्षभ॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - भरतश्रेष्ठ! वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण सचमुच महान हैं। वे समस्त देवताओं के भी देव हैं। कमलनेत्र श्रीकृष्ण से बढ़कर कोई नहीं है॥2॥
 
Bhishmaji said – Bharatshreshtha! Vasudevanandan Shri Krishna is truly great. He is also the god of all the gods. There is no one greater than lotus-eyed Shri Krishna. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)