श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.66.4 
को न्वयं यो भगवता प्रणम्य विनयाद् विभो।
वाग्भि: स्तुतो वरिष्ठाभि: श्रोतुमिच्छाम तं वयम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! ये कौन लोग थे, जिन्हें आपने नम्रतापूर्वक प्रणाम किया और जिनकी उत्तम वाणी से स्तुति की? हम उनके विषय में सुनना चाहते हैं॥4॥
 
Lord! Who were these people whom you humbly bowed to and praised with excellent words? We wish to hear about them.'॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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