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mahabharat 6.66.38: भरत! तुम जिनके विषय में मुझसे पूछ रहे हो, वे सनातन देवता, सर्वव्यापी मंगलमय परमेश्वर ही 'वासुदेव' नाम से जानने योग्य हैं॥38॥   |   mahabharat अध्याय 6.66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.66.38 
स एष शाश्वतो देव: सर्वगुह्यमय: शिव:।
वासुदेव इति ज्ञेयो यन्मां पृच्छसि भारत॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
भरत! तुम जिनके विषय में मुझसे पूछ रहे हो, वे सनातन देवता, सर्वव्यापी मंगलमय परमेश्वर ही 'वासुदेव' नाम से जानने योग्य हैं॥38॥
 
Bharata! The one about whom you are asking me, that eternal deity, the all-encompassing auspicious Supreme Being, is only worthy of being known by the name 'Vasudev'. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)