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mahabharat 6.66.15-16h: यह भगवान परम रहस्य है। यही परम पद है। यही परम ब्रह्म है। यही परम तेज है और यही सनातन, अव्यक्त और सनातन तेज है।॥ 15 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.66.15-16h 
एतत् परमकं गुह्यमेतत् परमकं पदम्।
एतत् परमकं ब्रह्म एतत् परमकं यश:॥ १५॥
एतदक्षरमव्यक्तमेतद् वै शाश्वतं मह:।
 
 
अनुवाद
यह भगवान परम रहस्य है। यही परम पद है। यही परम ब्रह्म है। यही परम तेज है और यही सनातन, अव्यक्त और सनातन तेज है।॥ 15 1/2॥
 
‘This God is the ultimate secret. He is the ultimate position. He is the ultimate Brahman. He is the ultimate glory and he is the eternal, unmanifest and eternal brilliance.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)