श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  6.65.19-20h 
तेनावध्या रणे पार्था जययुक्ताश्च पार्थिव।
तव पुत्रा दुरात्मान: पापेष्वभिरता: सदा॥ १९॥
निष्ठुरा हीनकर्माणस्तेन हीयन्ति संयुगे।
 
 
अनुवाद
महाराज! धर्म के कारण ही कुन्ती के पुत्र अजेय और युद्ध में विजयी हैं। दूसरी ओर आपके दुष्ट पुत्र पाप करने में सदैव तत्पर रहते हैं। क्रूर होने के साथ-साथ वे पाप कर्मों में भी संलग्न रहते हैं। इसीलिए उन्हें युद्धभूमि में हानि उठानी पड़ती है॥19 1/2॥
 
Maharaj! Because of Dharma, Kunti's sons are invincible and victorious in the war. On the other hand, your evil-minded sons are always ready to commit sins. Apart from being cruel, they are also engaged in evil deeds. That is why they have to bear losses in the battlefield.॥19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)