पितामहवच: श्रुत्वा तथा चक्रु: स्म कौरवा:।
उपायेनापयानं ते घटोत्कचभयार्दिता:॥ ७८॥
अनुवाद
पितामह भीष्म के ये वचन सुनकर कौरवों को एक उपाय सूझा और वे युद्ध से हटने को तैयार हो गए; क्योंकि उस समय वे घटोत्कच के भय से ग्रस्त थे।
On hearing these words of Grandfather Bhishma, the Kauravas found a way out and agreed to withdraw from the war; because at that time they were suffering from the fear of Ghatotkacha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥