Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.52.27-29h: तत्पश्चात्, अपार आत्मबल से युक्त, किरीटधारी नरसिंह अर्जुन ने भीष्म को पच्चीस बाणों से, कृपाचार्य को नौ बाणों से, द्रोणाचार्य को साठ बाणों से, विकर्ण को तीन बाणों से, शल्य को तीन बाणों से तथा राजा दुर्योधन को पाँच बाणों से घायल कर दिया। 27-28 1/2॥ | mahabharat अध्याय 6.52: भीष्म और अर्जुनका युद्ध । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स भीष्मं पञ्चविंशत्या कृपं च नवभि: शरै:॥ २७॥
द्रोणं षष्टॺा नरव्याघ्रो विकर्णं च त्रिभि: शरै:।
शल्यं चैव त्रिभिर्बाणै राजानं चैव पञ्चभि:॥ २८॥
प्रत्यविध्यदमेयात्मा किरीटी भरतर्षभ।
अनुवाद
तत्पश्चात्, अपार आत्मबल से युक्त, किरीटधारी नरसिंह अर्जुन ने भीष्म को पच्चीस बाणों से, कृपाचार्य को नौ बाणों से, द्रोणाचार्य को साठ बाणों से, विकर्ण को तीन बाणों से, शल्य को तीन बाणों से तथा राजा दुर्योधन को पाँच बाणों से घायल कर दिया। 27-28 1/2॥
Bharatshrestha! After that, Arjuna, the crowned male lion, full of immense self-power, wounded Bhishma with twenty-five arrows, Kripacharya with nine, Drona with sixty, Vikarna with three, Shalya with three and King Duryodhana with five arrows. 27-28 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥