Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.51.30: महाराज ! इस प्रकार हर्ष में भरकर कौरव और पाण्डव एक दूसरे को कष्ट देते हुए पुनः युद्ध के लिए रणभूमि में पहुँचे ॥30॥ | mahabharat अध्याय 6.51: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना तथा दोनों दलोंमें शंखध्वनि और सिंहनाद । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमेते महाराज प्रहृष्टा: कुरुपाण्डवा:।
पुनर्युद्धाय संजग्मुस्तापयाना: परस्परम्॥ ३०॥
अनुवाद
महाराज ! इस प्रकार हर्ष में भरकर कौरव और पाण्डव एक दूसरे को कष्ट देते हुए पुनः युद्ध के लिए रणभूमि में पहुँचे ॥30॥
Maharaj! In this way, filled with joy, the Kauravas and the Pandavas, tormenting each other, once again reached the battlefield for war. 30॥
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि कौरवव्यूहरचनायामेकपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें कौरव-व्यूह-रचनाविषयक इक्यावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५१॥
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ३१ श्लोक हैं।]
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥