श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक d2-d3
 
 
श्लोक  6.50.d2-d3 
(तच्छ्रुत्वा जहृषु: पार्था: पार्थिवाश्च महारथा:।
साधु साध्विति तद्वाक्यमूचु: सर्वे महीक्षित:॥
पुनरप्यब्रवीद् राजा धृष्टद्युम्नं महाबलम्॥ )
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर की यह बात सुनकर सभी पाण्डव तथा महारथी भूपालगण उन्हें 'साधु-साधु' कहकर उनके वचनों की सराहना करने लगे। तदनन्तर राजा युधिष्ठिर ने पुनः महाबली धृष्टद्युम्न से कहा-
 
Hearing this statement of Yudhishthira, all the Pandavas and Maharathi Bhupalgan started appreciating his words by calling him 'Sadhu-Sadhu'. After that, King Yudhishthir again said to the mighty Dhrishtadyumna –
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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