श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  6.50.9-10h 
वनं यास्यामि वार्ष्णेय श्रेयो मे तत्र जीवितुम्॥ ९॥
न त्वेतान् पृथिवीपालान् दातुं भीष्माय मृत्यवे।
 
 
अनुवाद
वार्ष्णेय! अब मैं वन में जाऊँगा। वहाँ अपना जीवन व्यतीत करना मेरे लिए लाभदायक होगा। इन राजाओं को भीष्म-तुल्य मृत्यु के हवाले करने में व्यर्थ ही कोई लाभ नहीं है।
 
Varshneya! Now I will go to the forest. It will be beneficial for me to spend my life there. There is no good in handing over these kings to Bhishma-like death in vain. 9 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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