श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  6.50.8-9h 
सोऽहमेवंगते मग्नो भीष्मागाधजलेऽप्लवे॥ ८॥
आत्मनो बुद्धिदौर्बल्याद् भीष्ममासाद्य केशव।
 
 
अनुवाद
केशव! ऐसी स्थिति में मैं अपनी बुद्धि की दुर्बलता के कारण भीष्म के साथ युद्ध करके भी बिना नौका के ही भीष्म रूपी गहरे समुद्र में डूब रहा हूँ।
 
Keshav! In such a situation, due to the weakness of my intellect, even after fighting with Bhishma, I am drowning in the deep ocean of Bhishma without a boat. 8 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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