श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  6.50.7-8h 
शक्यो जेतुं यम: क्रुद्धो वज्रपाणिश्च संयुगे।
वरुण: पाशभृद् वापि कुबेरो वा गदाधर:॥ ७॥
न तु भीष्मो महातेजा: शक्यो जेतुं महाबल:।
 
 
अनुवाद
क्रोधित यमराज, वज्रधारी इन्द्र, पाशधारी वरुण, तथा गदाधारी कुबेर को युद्ध में परास्त किया जा सकता है; किन्तु तेजस्वी एवं पराक्रमी भीष्म को परास्त करना असम्भव है।
 
‘An angry Yamraj, Indra wielding the thunderbolt, Varun wielding a noose or Kubera wielding a mace can perhaps be defeated in battle; But it is impossible to defeat the brilliant and powerful Bhishma. 7 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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