श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  6.50.57-58h 
एवमेनं महाव्यूहं व्यूह्य भारत पाण्डवा:॥ ५७॥
सूर्योदयं त इच्छन्त: स्थिता युद्धाय दंशिता:।
 
 
अनुवाद
भरत! इस प्रकार पाण्डवों ने क्रौंचारुण नामक एक विशाल सेना बनाई और युद्ध के लिए कवच आदि से सुसज्जित होकर सूर्योदय की प्रतीक्षा में खड़े हो गए।
 
Bharata! In this manner the Pandavas formed a great formation called Krauncharuna and stood waiting for the sunrise, all decked up in armour etc. for the battle.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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