श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  6.50.54-55h 
रथानामयुतं पक्षौ शिरस्तु नियुतं तथा।
पृष्ठमर्बुदमेवासीत् सहस्राणि च विंशति:॥ ५४॥
ग्रीवायां नियुतं चापि सहस्राणि च सप्तति:।
 
 
अनुवाद
उस सारस के पंख भाग में दस हजार रथ, अग्र भाग में एक लाख रथ, पृष्ठ भाग में दो लाख रथ और गर्दभ भाग में एक लाख सत्तर हजार रथ थे ॥54 1/2॥
 
There were ten thousand chariots in the wing portion of that crane, one hundred thousand chariots in the head portion, two hundred thousand chariots in the back portion and one hundred and seventy thousand chariots in the neck portion. ॥ 54 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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