श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 52-53
 
 
श्लोक  6.50.52-53 
अग्निवेश्यास्तु हुण्डाश्च मालवा दानभारय:॥ ५२॥
शबरा उद्भसाश्चैव वत्साश्च सह नाकुलै:।
नकुल: सहदेवश्च वामं पक्षं समाश्रिता:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
दोनों भाइयों नकुल और सहदेव ने अग्निवेश, हुंड, मालव, दानभारी, शबर, उद्भास, वत्स और नकुल जनपदों के साथ वामपंथ में शरण ली। ॥52-53॥
 
The two brothers Nakula and Sahadeva, along with the Agnivesha, Hunda, Malava, Danabhari, Shabara, Udbhasa, Vatsa and Nakula janapadas, took shelter on the left wing. ॥52-53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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