श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.50.41 
तं यथावत् प्रतिव्यूह परानीकविनाशनम्।
अदृष्टपूर्वं राजान: पश्यन्तु कुरुभि: सह॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तुम शत्रु सेना का संहार करने वाली क्रौंचारुण सेना की रचना करो। आज कौरवों सहित समस्त राजा उस अदृश्य सेना को अपनी आँखों से देखें।॥41॥
 
You should form the Krauncharuna formation that can destroy the enemy army. Today, all the kings should see that unseen formation with their own eyes along with the Kauravas.'॥ 41॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas