श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 34-36h
 
 
श्लोक  6.50.34-36h 
स त्वं पुरुषशार्दूल विक्रम्य जहि कौरवान्॥ ३४॥
अहं च तेऽनुयास्यामि भीम: कृष्णश्च मारिष।
माद्रीपुत्रौ च सहितौ द्रौपदेयाश्च दंशिता:॥ ३५॥
ये चान्ये पृथिवीपाला: प्रधाना: पुरुषर्षभ।
 
 
अनुवाद
पुरुष सिंह! तुम वीरता दिखाओ और कौरवों का नाश करो। मैरिश! नरश्रेष्ठ! मैं, भीमसेन, श्रीकृष्ण, माद्रीकुमार नकुल-सहदेव, द्रौपदी के पांचों पुत्र तथा अन्य सरदार भूपाल कवच पहनकर आपके पीछे चलेंगे। 34-35 1/2"
 
Purush Singh! You display bravery and destroy the Kauravas. Marish! Narashrestha! I, Bhimsen, Shri Krishna, Madri Kumar Nakul-Sahdev, Draupadi's five sons and other chieftains will follow you wearing Bhupal armor. 34-35 1/2"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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