श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  6.50.33-34h 
भवान् सेनापतिर्मह्यं वासुदेवेन सम्मित:।
कार्तिकेयो यथा नित्यं देवानामभवत् पुरा॥ ३३॥
तथा त्वमपि पाण्डूनां सेनानी: पुरुषर्षभ।
 
 
अनुवाद
आप भगवान श्रीकृष्ण के समान पराक्रमी मेरे सेनापति हैं। पुरुषरत्न! जिस प्रकार प्राचीन काल में भगवान कार्तिकेय देवताओं के सेनापति थे, उसी प्रकार आप भी पाण्डवों के सेनापति बनें। 33 1/2॥
 
You are my commander, as mighty as Lord Krishna. Purushratna! Just as Lord Kartikeya was the commander of the gods in ancient times, in the same way you too should be the commander of the Pandavas. 33 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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