श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.50.32 
धृष्टद्युम्न निबोधेदं यत् त्वां वक्ष्यामि मारिष।
नातिक्रम्यं भवेत् तच्च वचनं मम भाषितम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे वीर धृष्टद्युम्न! मैं जो कुछ कहता हूँ, उसे ध्यानपूर्वक सुनो। तुम्हें मेरे वचनों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए॥ 32॥
 
Respected brave Dhrishtadyumna! Listen carefully to what I tell you. You should not violate my words.॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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