श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.50.31 
एतच्छ्रुत्वा ततो राजा धृष्टद्युम्नं महारथम्।
अब्रवीत् समितौ तस्यां वासुदेवस्य शृण्वत:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण के वचन सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर ने उस सभा में महारथी धृष्टद्युम्न से कहा-॥31॥
 
Hearing this, Dharmaraja Yudhishthira, on hearing Lord Krishna's words, said to the great warrior Dhrishtadyumna in that assembly -॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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