श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.50.24 
तव प्रसादाद् गोविन्द पाण्डवा निहतद्विष:।
स्वराज्यमनुसम्प्राप्ता मोदिष्यन्ते सबान्धवा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
गोविन्द! आपकी कृपा से ही पाण्डव अपने शत्रुओं का वध करके स्वतन्त्रता प्राप्त करके अपने बन्धु-बान्धवों के साथ सुखी रहेंगे॥24॥
 
Govind! Only by your grace, the Pandavas will be happy with their friends and relatives after killing their enemies and attaining independence. 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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